नाथनगर केंद्र का स्वयंसेवक से जुड़ा प्रयास और कहानी…!

लेखक: नितिन इखर

नाथनगर केंद्र मौदा शहर का एक जीता जागता उदाहरण है। मौदा से बह रही पवित्र नदी के बीच में स्थित भगवान दत्तात्रेय का मंदिर बहुत पुराना है। कन्हान नदी के किनारे नाथनगर बस्ती है।             

 श्री.विनय सर और कुछ स्वयंसेवकों ने बहुत सोच समझकर उस स्थान का सर्वेक्षण किया। उन्हें लग रहा था कि यहाँ के बच्चों में शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा है , जिस से उनका भविष्य उज्जवल होगा और वे पढ़े लिखे अनुशासित नागरिक बनकर देश की तरक्की में भागीदार होंगे । हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना हमारा लक्ष्य है ,तथा जो शाला जाते हैैं, उनके शैक्षिक स्तर सुधार की दिशा में भी प्रयास करना है । बस्ती के बच्चे,मासूम हैं शायद वे किसी शिक्षक का इंतजार कर रहे थे , जो उनके जीवन को शिक्षा की रोशनी से प्रकाशित करे । नाथनगर केंद्र में श्री. विनय सर और कुछ स्वयंसेवकों , ने पढ़ाने की शुरुवात ,तेली समाज भवन की खुले स्थान पर की । रोजाना बच्चे वहाँ पर पढ़ने आते रहे। बच्चों को पढ़ने और खेलने में काफ़ी मज़ा आता और हम भी उनके सुप्त गुणों का समर्थन करते रहे ।

उपाय से जुड़ कर झुग्गी-झोपड़ी के बच्चे मजदूरी और भिक्षावृत्ति छोड़ कॉपी-कलम से प्रेम करने लगे हैं।

 बारिश के समय बच्चों खुलें आसमान में बैठने में परेशानी होने लगी । वहाँ पर सड़क किनारे एक बहुत पुराना और अच्छा राम मंदिर है। स्वयंसेवकों ने मंदिर के व्यवस्थापक से बातचीत करके मंदिर में बच्चों को पढ़ाने के लिए अनुमति ली । दुसरे दिन मंदिर और आसपास के परिसर की साफ-सफाई बच्चों के साथ मिलकर की । वहां पर रोशनी की व्यवस्था भी की गई। सेंटर पर आने वाले बच्चे बहुत ही समझदार हैं। रोजाना शाम के समय पढ़ने आते हैं। वहाँ के स्वयंसेवकों में अपने काम को ईमानदारी से करने का जुनून हमेशासे ही था। संस्था के प्रति सभी स्वयंसेवकों के भीतर एक जुनून,आत्मविश्वास और शक्तिशाली ऊर्जा है।     

       नाथनगर केंद्र पर बहुत से स्वयंसेवक जुड़े और कुछ उच्च शिक्षा प्राप्त करने चले गये। नाथनगर केंद्र आज भी वहीं स्थापित है। बच्चें हमेशा केंद्र केे प्रति गर्व महसूस करते है। केंद्र के कुछ साल अच्छी तरह गुजर गये और एक दिन राम मंदिर के व्यवस्थापक ने मंदिर में सेंटर चलाने से इंकार कर दिया । “सचमुच किसी ने कहा है की, समाज के लिये अच्छा काम करने वालों को बहुत मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।” उनका कहना था कि, बच्चें वहाँ पर गंदगी और तोड़फोड करते हैं। स्वयंसेवकों को बाद में पता चला कि, वहां पर कुछ लोग चोर शराबी,चरस गांझा और ताशपत्ते खेलने आते और नाम उपाय के बच्चों पर आता है।                  

“दुनिया में कोई काम असंभव नहीं, बस हौसला और मेहनत की जरुरत है।” कुछ दिन बाद स्वयंसेवकों ने पंचायत समिति का दरवाजा खट-खटाया और मंदिर के बगलवाली अंगनवाड़ी केंद्र उपाय के लिये शाम के समय उपलब्ध हो गया । उपाय संस्था हमेशा पंचायत समिति के श्री. लक्ष्मीकांत बोहटे सर और श्री. मनोहर अड़क सर के शुक्रगुजार है।                

प्रतिबद्ध मन को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, पर अंत में उसे अपने परिश्रम का फल मिला कु. रेशमा साठवणे नाम कि स्वयंसेवक ने उस केंद्र को काफ़ी बेहतरीन तरीके से स्वयंसेवकों के साथ मिलकर बहुत ही अच्छे तरह चलाया। आज मौदा झोन के दस (१०) केंद्र बहुत अच्छे से चल रहे हैं। सभी केंद्र के स्वयंसेवकों में लगन से पढ़ाने और नेककार्य करने की इच्छा शक्ति नज़र आती है।  नाथनगर केंद्र पर १ ली कक्षा से ९वी कक्षा तक पढ़ाने , कृति के माध्यम से स्वयंसेवक कुछ सीखकर जाते हैं । कु.रेशमा साठवणे मैडम उस केंद्र की केंद्र प्रमुख हैं। जिन्हें _”सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवक उत्कृष्टता पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। बच्चों को भी उपाय क्रिडा स्पर्धा और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी पारितो्षिक प्राप्त हुआ है।

कु.रेशमा साठवणे – केंद्र प्रमुख ( नाथनगर )

सेंटर के स्वंयसेवक: मीनाक्षी मैडम , नेहा मैडम, रेशमा मैडम , अमोल सर के लगन और निष्ठा की हम सराहना करते है और आशा है इसी तरह वे केंद्र एवं गांव के बच्चों तक शिक्षा का अधिकार पहुंचाते रहेंगे।
उपाय सभी स्वयंसेवकों का समाज में बहुमूल्य योगदान के बहुत बहुत धन्यवाद।

कोशिश एक बेहतर कल की….


Published by UPAY - उपाय

UPAY ...An initiative to educate Under Privileged Children from Slums & Footpaths by a group of young Engineers, Doctors , Students and senior citizens

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